ऋषिकेश- निर्मल आश्रम ज्ञान दान अकैडमी ,ऋषिकेश में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण को प्रोत्साहित करने विषय पर एक दिवसीय सीबीएसई कार्यशाला का सफलतापूर्वक एवं प्रभावशाली आयोजन किया गया। कार्यशाला प्रातः 9 बजे से सायं 5 बजे तक आयोजित की गई। इसका उद्देश्य शिक्षकों को विद्यार्थियों के मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बनाना तथा उन्हें व्यवहारिक एवं प्रभावी मार्गदर्शन प्रदान करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ ललिता कृष्णास्वामी (अध्यक्ष, सीबीएसई सहोदया) एवं अनिता रतूडी़ (सचिव, सीबीएसई सहोदया) के द्वारा किया गया। अपने प्रेरणादायी संबोधन में उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक परिवेश में विद्यार्थियों का मानसिक स्वास्थ्य उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उनका शैक्षणिक विकास। शिक्षक न केवल ज्ञानदाता हैं, बल्कि विद्यार्थियों के भावनात्मक मार्गदर्शक भी हैं।

कार्यशाला के दौरान तनाव प्रबंधन, परीक्षा संबंधी दबाव से निपटने की रणनीतियाँ, सकारात्मक सोच का विकास, भावनात्मक संतुलन, आत्मविश्वास निर्माण तथा विद्यालय में सहयोगात्मक एवं सुरक्षित वातावरण के निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। गतिविधि-आधारित प्रशिक्षण, समूह चर्चा, अध्ययन-प्रकरण (केस स्टडी) एवं प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से शिक्षकों को व्यावहारिक एवं उपयोगी सुझाव प्रदान किए गए। प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने अनुभव साझा किए और कार्यशाला को अत्यंत उपयोगी एवं समसामयिक बताया।
इस प्रशिक्षण सत्र में विभिन्न प्रतिष्ठित विद्यालयों दून इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल हिमालयन पब्लिक स्कूल साईं बाबा इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्यों एवं निर्मल आश्रम ज्ञान दान अकैडमी डीएसबी इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल, पारस पब्लिक स्कूल, श्री गुरु राम राय पब्लिक स्कूल, देहरादून सहित अन्य विद्यालयों के शिक्षकों ने सहभागिता की।

कार्यशाला का समापन विद्यालय की प्रधानाचार्या Dr. Suneeta Sharma एवं हेडमिस्ट्रेस Amrit Pal Dang द्वारा सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए किया गया। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ शिक्षकों को विद्यार्थियों के समग्र एवं संतुलित विकास हेतु अधिक सक्षम और सजग बनाती हैं।
यह कार्यशाला ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक एवं अत्यंत सफल सिद्ध हुई, जिसने विद्यालयी शिक्षा में मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को और अधिक सुदृढ़ किया।